हाथरस। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर जिलाधिकारी अतुल वत्स ने विकास खण्ड मुरसान की ग्राम पंचायत धातुरा खुर्द में संचालित अस्थाई गौ आश्रय स्थल का निरीक्षण किया तथा परिसर में नीम का पौधा रोप कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
जिलाधिकारी ने गौ आश्रय स्थल परिसर में नीम का पौध रोपण करते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। वृक्ष न केवल पर्यावरण को संतुलित बनाए रखते हैं बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ एवं स्वस्थ वातावरण सुनिश्चित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने उपस्थित अधिकारियों, कर्मचारियों एवं ग्रामीणों से अधिक से अधिक पौधे लगाने तथा उनके संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पौधरोपण तभी सार्थक होगा जब लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल एवं संरक्षण सुनिश्चित किया जाए।
जिलाधिकारी अतुल वत्स ने कहा कि आज दो अत्यंत महत्वपूर्ण दिवस हैं। पहला विश्व पर्यावरण दिवस, जिसके उपलक्ष्य में इस गौशाला का चयन करते हुए वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया है तथा गौशाला को छायायुक्त एवं हरित बनाने के उद्देश्य से एक आधारशिला भी रखी गई है। दूसरा महत्वपूर्ण अवसर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का जन्मदिवस है। उन्होंने मुख्यमंत्री को हार्दिक शुभकामनाएं प्रेषित करते हुए कहा कि उनके प्रति अपनी सच्ची श्रद्धा व्यक्त करने का सबसे अच्छा माध्यम उनके आह्वान को सफल बनाना है। उन्होंने बताया कि जनपद के सभी विधानसभा क्षेत्रों में वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं तथा निर्धारित लक्ष्य को पूरा करने के लिए सभी विभाग एवं जनप्रतिनिधि सहयोग कर रहे हैं।
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने गौ आश्रय स्थल में संरक्षित गोवंशों के रख-रखाव, चारे, पेयजल, साफ-सफाई एवं अन्य व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों एवं कर्मचारियों को निर्देशित किया कि गोवंशों के स्वास्थ्य एवं देखभाल में कोई लापरवाही न बरती जाए। जिलाधिकारी ने छोटे बछड़ों एवं बीमार गोवंशों को अलग से रखने हेतु जालीयुक्त टीनशेड बनाए जाने के निर्देश दिए। व्यवस्थाएं दुरुस्त रखने के लिए आवश्यकतानुसार केयर टेकर की तैनाती करते हुए शिफ्टवार ड्यूटी लगाने तथा अवशेष निर्माण कार्यों को गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूर्ण करने के निर्देश दिए।
गौशाला में संरक्षित गोवंश एवं व्यवस्थाओं की जानकारी देते हुए उप जिलाधिकारी सदर ने बताया कि गौशाला में 128 निराश्रित गोवंश (54 नर, 74 मादा) मौजूद हैं। देखरेख हेतु पांच केयर टेकर तैनात हैं। तीन टीन शेड, चारा खाने हेतु दो चरही, दो पानी पीने के हॉज, एक समरसेबिल संचालित हैं। 35 कुंतल भूसा उपलब्ध है। गौशाला में लगभग 42 बीघा जमीन है, जिसमें से लगभग 20 बीघे में गौशाला निर्मित है। दो कैमरे भी संचालित हैं तथा भूसा रखने हेतु एक बड़ा भूसा बनाया गया है।
इस अवसर पर प्रभागीय वनाधिकारी, उप जिलाधिकारी सदर, पंचायत सहायक, ग्राम प्रधान आदि उपस्थित रहे।
