हाथरस। जनपद के इतिहास, संस्कृति, भूगोल और समृद्ध विरासत को सहेजने के लिए जिला गजेटियर का अद्यतन एवं प्रकाशन किया जा रहा है। इसके लिए कलेक्ट्रेट सभागार में मुख्य विकास अधिकारी पीएन दीक्षित की अध्यक्षता में बैठक आयोजित हुई, जिसमें सभी विभागीय अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
बैठक में सीडीओ ने स्पष्ट किया कि जिन विभागों की अध्यायवार रिपोर्ट लंबित है, वे तत्काल अपना ड्राफ्ट उपलब्ध कराएँ। उन्होंने बताया कि गजेटियर में कुल 11 अध्याय होंगे, जिनमें जनपद का भौगोलिक स्वरूप, ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, जनसंख्या, कृषि, उद्योग, शिक्षा, स्वास्थ्य, सांस्कृतिक धरोहर एवं लोक परंपराओं को विस्तार से शामिल किया जाएगा।
मुख्य विकास अधिकारी ने कहा कि सभी विभागों से प्राप्त रिपोर्ट की प्रमाणिकता सुनिश्चित की जाएगी। इसके लिए प्रत्येक सूचना का पुनः परीक्षण एवं सत्यापन किया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर संकलित डेटा में सुधारात्मक कार्य भी किए जाएँगे, ताकि गजेटियर पूर्णतः त्रुटिहीन, व्यापक एवं उपयोगी बन सके। उन्होंने कहा कि यह केवल एक प्रशासनिक दस्तावेज नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए विरासत होगा। उन्होंने कहा कि गजेटियर जनपद की सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित रखने का महत्वपूर्ण माध्यम होगा।
सीडीओ ने जनपदवासियों से विशेष अपील करते हुए कहा कि यदि किसी के पास ऐतिहासिक तथ्य, प्राचीन दस्तावेज, पुरालेख, लोक परंपराएँ, साहित्यिक जानकारी या भौगोलिक डेटा उपलब्ध हो, तो वह उसे जिला अर्थ एवं संख्या अधिकारी कार्यालय, विकास भवन, हाथरस में निर्धारित प्रारूप पर जमा कर सकते हैं।
उन्होंने प्रबुद्ध नागरिकों, इतिहासकारों, शिक्षाविदों, साहित्यकारों, शोधार्थियों और मीडिया प्रतिनिधियों से भी आग्रह किया कि वे इस अभियान में योगदान दें। गजेटियर को और अधिक समृद्ध बनाने के लिए शैक्षणिक संस्थानों, पुस्तकालयों एवं शोध संस्थानों से समन्वय स्थापित कर अधिकाधिक उपयोगी सामग्री संकलित करने पर भी जोर दिया गया।
बैठक में अपर जिलाधिकारी (न्यायिक), परियोजना निदेशक, जिला विकास अधिकारी, मुख्य चिकित्साधिकारी, प्रभारी अधिकारी कलेक्ट्रेट, सभी उपजिलाधिकारी, जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी सहित सभी जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे।
