हाथरस। नगर के प्रमुख समाजसेवी एवं आरटीआई कार्यकर्ता एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष राजीव वार्ष्णेय ने सोमवार को पुलिस और परिवहन विभाग की चालान प्रथा पर सख्त रोक लगाने की मांग करते हुए मुख्यमंत्री के नाम जिलाधिकारी के माध्यम से ज्ञापन भेजा है।
राजीव वार्ष्णेय ने ज्ञापन में कहा है कि सड़कों पर चल रही मौजूदा चालान व्यवस्था सुधार के बजाय अब सिर्फ दंड और उत्पीड़न का हथियार बनकर रह गई है। जहां यातायात नियमों के पालन की नीयत से शुरू की गई थी यह व्यवस्था, वहीं अब यह भ्रष्टाचार की कर्तव्य बन चुकी है। सबसे अधिक मार झेल रहे हैं आम नागरिक, मजदूर, छोटे व्यापारी और मध्यमवर्गीय परिवार।
राजीव वार्ष्णेय ने बताया कि लगातार शिकायतें मिल रही हैं कि सघन चेकिंग के नाम पर लोगों को बिना वजह रोका जाता है और भारी-भरकम चालान के डर से मौके पर ही अवैध वसूली की जाती है। तकनीकी कमियों या छोटे दस्तावेज साथ न होने पर गरीब चालकों से मोटी रकम ऐंठी जाती है। कई बार तो बिना नियम तोड़े भी नकद चालान का भूत दिखाकर उगाही की जाती है। इस बढ़ती मनमानी पर विराम लगाने के लिए संगठन ने सीएम को पांच सूत्री मांग पत्र सौंपा है।
ज्ञापन के माध्यम से कहा गया है कि सड़कों पर नकद चालान की व्यवस्था पर तुरंत रोक लगाई जाए, ताकि पुलिस और जनता के बीच सीधे लेन-देन की गुंजाइश ही खत्म हो जाए। इसके स्थान पर सीसीटीवी, स्पीड रडार और ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन सिस्टम से ई-चालान सीधे वाहन स्वामी के रजिस्टर्ड मोबाइल या पते पर भेजा जाए। ज्ञापन में यह भी सुझाव दिया गया है कि पहली या दूसरी बार मामूली उल्लंघन पर भारी जुर्माना ठोंकने के बजाय चेतावनी दी जाए और जरूरी दस्तावेज जमा करने के लिए उचित समय सीमा मुहैया कराई जाए। साथ ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर मौजूद दस्तावेजों को पूरी तरह वैध मानने की भी मांग की गई है।
आरटीआई कार्यकर्ता एसोसिएशन का कहना है कि प्रदेश सरकार चाहकर भी अगर चालान व्यवस्था में तकनीकी सुधार कर दे तो न सिर्फ जमीनी स्तर पर भ्रष्टाचार पर अंकुश लग सकता है, बल्कि आम जनता का कानून और शासन पर भरोसा भी मजबूत होगा।
