हाथरस। मानव कल्याण सामाजिक संस्था ने स्मार्ट प्रीपेड मीटरों के विरोध में प्रदेशभर में दर्ज मुकदमों को वापस लेने की मांग को लेकर जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा। संस्था पदाधिकारियों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भी अपनी मांग को प्रमुखता से उठाया। ज्ञापन में कहा गया कि उत्तर प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड मीटरों को लेकर जनता में व्यापक आक्रोश है। तकनीकी खामियों और अधिक बिलिंग के कारण उपभोक्ता आर्थिक और मानसिक परेशानियों का सामना कर रहे हैं। संस्था ने आरोप लगाया कि विभिन्न जिलों में विरोध प्रदर्शन करने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं और नागरिकों पर एफआईआर दर्ज कराई गई हैं, जो अनुचित है।

संस्थापक राजीव वार्ष्णेय ने कहा कि लोकतंत्र में अपनी समस्याओं को लेकर आवाज उठाना नागरिकों का अधिकार है। उन्होंने प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मुकदमों को तत्काल निरस्त करने की मांग की। मुख्य संरक्षक एवं वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश बल्लभ वशिष्ठ ने कहा कि आंदोलन जनता के हित और अस्तित्व की लड़ाई थी, इसलिए सरकार को दंडात्मक कार्रवाई के बजाय सहानुभूतिपूर्वक विचार करना चाहिए।

जिला अध्यक्ष नारायण लाल ने कहा कि प्रदेश की जनता बिजली विभाग की कार्यप्रणाली से परेशान है और जब तक मुकदमे वापस नहीं होंगे, लोगों में असुरक्षा की भावना बनी रहेगी।

जिला महामंत्री कन्हैया वार्ष्णेय ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों पर कार्रवाई उचित नहीं है।

जिला वरिष्ठ उपाध्यक्ष राजेंद्र वार्ष्णेय ने उपभोक्ताओं की समस्याओं का समाधान करने और दर्ज एफआईआर समाप्त करने की मांग उठाई।

संस्था ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि प्रदेशभर में स्मार्ट प्रीपेड मीटरों के विरोध में दर्ज सभी एफआईआर बिना शर्त वापस ली जाएं, आंदोलनकारियों का उत्पीड़न रोका जाए तथा उपभोक्ता हितैषी और पारदर्शी बिजली व्यवस्था लागू की जाए।

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