माँ किसी तारीफ की मोहताज नहीं,
वह हर रूप में सुंदर है ,जैसे खिलता गुलाब कोई।
मैंने देखा है उन्हें हमेशा संघर्षों से लड़ते हुए,
जिंदगी के सफर में हमें अकेले बड़ा करते हुए।
नम होती हैं आंखें उनकी तो भी मेरे लिए मुस्कुराती है,
आंखों में मेरी आंसू ना आए ,यही मन में उनके हमेशा प्रार्थना आती है।
बता दूं उन्हें पूरे दिन की गाथा, मेरे लिए संतुष्टि है यही ।
माँ किसी तारीफ की मोहताज नहीं,
अपने ख्वाबों को साइड में रखकर ,वह मेरे ख्वाब सजा देती है।
हार न जाऊं मैं किसी राह पर ,वह मुझे मुझसे हर बार मिला देती है।सीख देती है हमेशा सही।
माँ किसी तारीफ की मोहताज नहीं,
तिनके – तिनके से मैंने घर बनाते उन्हें देखा है,
किसी पर निर्भर ना हो जाऊं मैं ,उन्हें आत्मनिर्भर बनाते हमें देखा है,
सूती साड़ी में जिंदगी गुजारते उन्हें मैंने देखा है ,
स्वाभिमान के साथ समझौता कभी करती है नहीं ।
माँ किसी तारीफ की मोहताज नहीं,
वो कोई उलझी पहेली है नहीं,
इस दुनिया में एक सच्ची सहेली है वही।
मैं करूं न भी याद अगर भगवान को , कोई गम मुझे है नहीं,
सुबह की अरदास ,पहले गुरु बस मेरी माँ तू है मेरी।
तो कैसे कह दूं कि मेरी पूजा अधूरी है रही ।
माँ किसी तारीफ की मोहताज नहीं……
-प्रियंका खन्ना
