हाथरस। भगवान कृष्ण के बचपन की मनमोहक और अलौकिक लीलाएं आज भी ब्रज दर्शन में जीवंत हैं। माखन चोरी, पूतना वध, गोवर्धन पूजा और ग्वाल-बालों संग क्रीड़ा जैसे प्रसंग उनकी दिव्यता, शरारत और भक्तों के प्रति अपार प्रेम को दर्शाते हैं। ये लीलाएं नंद-यशोदा और व्रजवासियों के लिए आनंद और भक्ति का स्रोत रहीं।
बलकेश्वर महादेव सरक्यूलर रोड पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के पंचम दिवस पर कथा व्यास रसराज दास महाराज ने कृष्ण बाल लीलाओं का रसपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भगवान कृष्ण को माखन चोर इसलिए कहा गया क्योंकि उन्होंने बाल्यकाल में नटखट शरारतों से सबका मन मोह लिया, लेकिन माखन मानव हृदय में छिपे प्रेम और भक्ति का प्रतीक है, जिसे कृष्ण अपने साथ ले जाना चाहते हैं।
पूतना वध प्रसंग का वर्णन करते हुए उन्होंने बताया कि पूतना ने सुंदर स्त्री का रूप धरकर विष लगे स्तनों से कृष्ण को दुग्धपान कराया, लेकिन कृष्ण ने उसके प्राणों सहित विष का अंत कर दिया। पूतना पूर्व जन्म में राजा बलि की पुत्री रत्नमाला थी, जिसके मन में भगवान वामन को देखकर मातृत्व भाव जागा था।गोवर्धन पूजा का प्रसंग सुनाते हुए कथा व्यास ने कहा कि कृष्ण ने इंद्र के अहंकार को समाप्त कर प्रकृति और गौ-पूजा का संदेश दिया। मूसलाधार वर्षा से ब्रजवासियों की रक्षा के लिए उन्होंने गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उंगली पर सात दिनों तक धारण किया। इस लीला से अहंकार त्याग और ईश्वर पर अटूट विश्वास का संदेश मिलता है। इसी उपलक्ष्य में अन्नकूट उत्सव मनाया जाता है, जिसमें 56 भोग अर्पित किए जाते हैं। कथा आयोजन की व्यवस्था में प्रेमचंद वर्मा, किशोरीरमन वर्मा, प्रवीन वार्ष्णेय, राधारमण वर्मा, राजू लाला, ओमप्रकाश वर्मा, राजकुमार वर्मा, महेश वर्मा, दिलीप वर्मा, बिंटू वर्मा, अमित, बिपिन, विशाल, तरुण, अंकित, अरुण, गोपाल, राम वर्मा, टिंकू वर्मा, योगेश वर्मा, दाऊजी वर्मा, सचिन वर्मा, दाऊदयाल वर्मा, कृष्णा, बिपिन कांत, मनोज वार्ष्णेय, प्रवीण वार्ष्णेय, अमरप्रकाश वार्ष्णेय, राजू वार्ष्णेय, अरुण अग्रवाल, मनीष अग्रवाल सहित अनेक श्रद्धालु सक्रिय रूप से सहयोग कर रहे हैं।
