हाथरस। राष्ट्रीय सवर्ण परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंकज धवरैया से मिलने पहुंचे राष्ट्रीय विप्र एकता मंच के अध्यक्ष मित्रेश चतुर्वेदी को प्रशासन ने सोमवार को रास्ते में ही रोक दिया। धवरैया को यूजीसी एक्ट के विरोध में सनातन स्वाभिमान यात्रा पर रवाना होने से पहले हाउस अरेस्ट किया गया था और वह अपने कंचन नगर स्थित आवास के बाहर तीसरे दिन भी अनशन पर डटे हुए हैं।
मित्रेश चतुर्वेदी ने धवरैया से मिलने की घोषणा कर हाथरस का रुख किया, लेकिन घटनास्थल के पास ही भारी पुलिस बल ने उनकी गाड़ी को रोक लिया। लंबी बहस के बाद भी प्रशासन ने यह कहते हुए उन्हें आगे नहीं जाने दिया कि जिलाधिकारी की अनुमति के बिना धवरैया से कोई भी व्यक्ति नहीं मिल सकता। इस दौरान चतुर्वेदी ने मौके पर मौजूद पत्रकारों से बात करते हुए प्रशासन की कार्यशैली पर गहरी नाराजगी जताई।
मित्रेश चतुर्वेदी ने कहा कि यूजीसी एक्ट से सवर्ण समाज के हितों पर चोट की गई है। सनातन स्वाभिमान यात्रा इसी आवाज को प्रधानमंत्री तक पहुंचाने के लिए निकाली गई थी, लेकिन प्रशासन ने उसके संयोजक को असंवैधानिक तरीके से बंधक बना लिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कड़ाके की ठंड में खुले में अनशन कर रहे धवरैया के जीवन और स्वास्थ्य से खिलवाड़ किया जा रहा है।
चतुर्वेदी ने कहा कि जेल में भी कैदियों से मिलने का समय निर्धारित होता है, लेकिन यहां शांति व्यवस्था के नाम पर एक अकेले व्यक्ति से मिलने तक को रोका जा रहा है। यह लोकतांत्रिक और संवैधानिक अधिकारों का सीधा हनन है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर किसी भी स्तर पर उत्पीड़न जारी रहा तो इसके गंभीर परिणाम होंगे।
इसी क्रम में परशुराम दल के प्रदेश अध्यक्ष सतेंद्र लवानिया अपनी टीम के साथ तथा आगरा सवर्ण आर्मी, हाथरस बार एसोसिएशन के अधिवक्ता और अन्य संगठनों के पदाधिकारी भी धवरैया से मिलने पहुंचे, लेकिन सभी को प्रशासन ने वापस लौटने पर मजबूर कर दिया। लौटते समय इन नेताओं और कार्यकर्ताओं ने प्रशासन पर तानाशाही और दमनकारी रवैया अपनाने के गंभीर आरोप लगाए।
