हाथरस। जिले में अवैध निर्माण और प्रशासनिक मिलीभगत का एक गंभीर मामला अब राष्ट्रीय स्तर पर तूल पकड़ता जा रहा है। सूचना का अधिकार कार्यकर्ता एसोसिएशन (पंजीकृत) ने ‘श्री जी फार्म हाउस’ के कथित अवैध संचालन और जानलेवा अतिक्रमण को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, नई दिल्ली का दरवाजा खटखटाया है। एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष राजीव वार्ष्णेय ने विस्तृत ज्ञापन भेजकर स्थानीय प्रशासन और विद्युत विभाग पर ‘आपराधिक मिलीभगत’ के गंभीर आरोप लगाए हैं।ज्ञापन में कहा गया है कि यह मामला केवल अवैध कब्जे तक सीमित नहीं है, बल्कि सीधे तौर पर अनुच्छेद 21 के उल्लंघन से जुड़ा हुआ है। आरोप है कि फार्म हाउस के मुख्य स्टेज के ऊपर से गुजर रही 33 केवी हाईटेंशन लाइन किसी भी समय बड़े हादसे को न्योता दे रही है। इसके बावजूद संबंधित विभाग पिछले दो वर्षों से शिकायतों पर आंख मूंदे बैठे हैं।एसोसिएशन का आरोप है कि विद्युत विभाग और पीडब्ल्यूडी अधिकारियों की निष्क्रियता मात्र लापरवाही नहीं, बल्कि मिलीभगत का संकेत है। कई बार लिखित शिकायतों और चेतावनियों के बावजूद न तो अतिक्रमण हटाया गया और न ही बिजली लाइन को सुरक्षित किया गया। इससे क्षेत्र में कभी भी बड़ा हादसा होने की आशंका बनी हुई है।मामले को गंभीर बताते हुए आयोग से स्वत: संज्ञान लेने की मांग की गई है। ज्ञापन में कहा गया है कि दोषी अधिकारियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धाराओं में तत्काल एफआईआर दर्ज कराई जाए। साथ ही जन सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ‘श्री जी फार्म हाउस’ को तत्काल सील करने और संबंधित अधिकारियों से एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) तलब करने की मांग भी उठाई गई है।एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि यदि भविष्य में इस स्थल पर कोई हादसा होता है, तो संबंधित एक्सईएन (विद्युत) और फार्म हाउस संचालक के खिलाफ हत्या के प्रयास जैसी गंभीर धाराओं में कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया गया है कि विभागीय रिपोर्टों में अतिक्रमण की पुष्टि और जिलाधिकारी के आदेशों के बावजूद कार्रवाई का ठप पड़ जाना एक बड़े घोटाले की ओर इशारा करता है।प्रेस नोट में पीएमओ को भेजी गई कथित भ्रामक रिपोर्ट पर भी सवाल उठाए गए हैं। राजीव वार्ष्णेय ने कहा कि मामले को ‘निस्तारित’ दिखाना केंद्र सरकार के साथ धोखाधड़ी के समान है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि जब तक दोषी अधिकारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही तय नहीं होती, तब तक यह लड़ाई जारी रहेगी।इस पूरे घटनाक्रम ने हाथरस प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि मानवाधिकार आयोग इस मामले में क्या रुख अपनाता है और क्या वाकई जिम्मेदार अधिकारियों पर कोई ठोस कार्रवाई होती है या नहीं।
